
यूट्यूब के बाद अब इंस्टाग्राम भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार कंटेंट को लेकर अपनी नीतियों में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी (Adam Mosseri) ने 2026 की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए आगाह किया है कि AI तकनीक के कारण अब असली और नकली कंटेंट के बीच का फर्क खत्म होता जा रहा है।
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संदेह अब डिफ़ॉल्ट होगा
- मोसेरी का मानना है कि अब वह समय आ गया है जब यूजर्स को ऑनलाइन दिखने वाली हर चीज़ पर पहले संदेह करना होगा। उन्होंने कहा कि हम “जो देखते हैं उसे सच मानने” के दौर से निकलकर अब “संदेह” के दौर में प्रवेश कर रहे हैं।
“परफेक्ट” कंटेंट का अंत
- इंस्टाग्राम पर अब तक जो एकदम ‘पॉलिश’ और शानदार दिखने वाले फोटो-वीडियो का चलन था, वह AI के कारण खत्म हो रहा है। मोसेरी के अनुसार, अब लोग अधिक ‘रॉ’ (Raw) और वास्तविक दिखने वाला कंटेंट पसंद कर रहे हैं क्योंकि परफेक्शन को अब AI आसानी से कॉपी कर सकता है।
AI लेबलिंग और सख्त नियम
- गूगल के ‘नैनो बनाना’ (Nano Banana) और ओपेन एआई के ‘सोरा’ (Sora) जैसे टूल्स के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इंस्टाग्राम AI कंटेंट पर स्पष्ट लेबलिंग (Labeling) अनिवार्य कर रहा है। इसके अलावा, अगस्त 2026 से यूरोपीय संघ के नियमों के तहत AI कंटेंट पर मशीन-रीडेबल और विजिबल मार्किंग जरूरी होगी।
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असली कंटेंट की “फिंगरप्रिंटिंग”
- भविष्य की रणनीति के रूप में, मोसेरी ने सुझाव दिया है कि केवल नकली को पहचानना काफी नहीं होगा, इसके बजाय, कैमरा निर्माताओं को फोटो खींचते समय ही उसे डिजिटल रूप से साइन (Cryptographic Sign) करना चाहिए ताकि उसकी असलियत प्रमाणित हो सके।
क्रिएटर के लिए क्या बदलेगा?
इंस्टाग्राम अब उन क्रिएटर्स को अधिक प्राथमिकता देगा जो अपनी विशिष्ट और मूल (Original) शैली को बनाए रखते हैं, प्लेटफॉर्म ऐसे टूल्स विकसित कर रहा है जो न केवल AI कंटेंट को लेबल करेंगे, बल्कि ओरिजिनल कंटेंट की रैंकिंग में भी सुधार करेंगे।

















