
उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच सड़क कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देने की तैयारी पूरी हो चुकी है, केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे परियोजना को मंजूरी दे दी है, लगभग 747 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे न केवल दो राज्यों की दूरी कम करेगा, बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को भी पूरी तरह बदल देगा।
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747 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर, ₹15,000 करोड़ का निवेश
यह विशाल प्रोजेक्ट लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया जाएगा। NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे 4 से 6 लेन का होगा, जिसे भविष्य में यातायात के दबाव को देखते हुए 8 लेन तक विस्तारित करने का विकल्प खुला रखा गया है। यह मार्ग उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली होते हुए हरियाणा के पानीपत तक जाएगा।
100 से अधिक गांवों की बदलेगी तकदीर
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से उत्तर प्रदेश के लगभग 22 जिलों को सीधा लाभ मिलने वाला है। विशेष रूप से गोरखपुर और बस्ती मंडल के 133 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को गति दे दी गई है। एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पिछड़े इलाकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
किन जिलों से होकर गुजरेगा यह महामार्ग?
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से को कवर करेगा, जिसमें प्रमुख जिले शामिल हैं:
- पूर्वांचल: गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बलरामपुर, बहराइच।
- तराई और मध्य यूपी: लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर।
- पश्चिमी यूपी: बदायूं, बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, मेरठ, शामली।
- हरियाणा: शामली के रास्ते यह एक्सप्रेसवे सीधे पानीपत से जुड़ेगा।
प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति (Status)
परियोजना फिलहाल DPR (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) और भूमि चिन्हित करने के चरण में है। NHAI ने अधिकारियों को मार्च 2026 तक DPR को अंतिम रूप देने और भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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व्यापार और यात्रा में होगा बड़ा बदलाव
वर्तमान में गोरखपुर से पानीपत जाने में यात्रियों को दिल्ली होकर गुजरना पड़ता है, जिससे भारी जाम और समय की बर्बादी होती है, इस नए एक्सप्रेसवे के बनने से गोरखपुर से हरियाणा की दूरी तय करने में लगने वाला समय लगभग आधा हो जाएगा। साथ ही, यह मार्ग कृषि उत्पादों और औद्योगिक माल की ढुलाई के लिए एक लाइफलाइन साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे के बाद, गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे में मील का पत्थर साबित होगा, जो राज्य को ‘वन ट्रिलियन इकोनॉमी’ बनाने के लक्ष्य की ओर अग्रसर करेगा।

















