
दोस्तों, आजकल फोन पर आने वाले हर SMS पर शक होता है ना? बैंक का मैसेज लगे तो सोचते हैं कि कहीं फर्जी तो नहीं। लेकिन TRAI ने एक कमाल का नियम लाकर सबकी राह आसान कर दी है। अब हर असली मैसेज के हेडर के आखिर में P, S, T या G जैसे कोड्स लगेंगे, जो बताएंगे कि मैसेज किस तरह का है। इससे स्कैमरों की चालाकी पल में पकड़ में आ जाएगी।
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ये कोड्स क्या बताते हैं?
सबसे पहले समझिए इन चारों कोड्स का मतलब। अगर हेडर में -P लिखा है, तो वो प्रमोशनल मैसेज है – जैसे कोई दुकान या कंपनी की सेल, लोन ऑफर या ऐसी मार्केटिंग चीजें। ये वैध कंपनियों से आते हैं, लेकिन अगर आपको इंटरेस्ट न हो तो इग्नोर कर दें। -S का मतलब सर्विस मैसेज। ये वो होते हैं जो आपकी रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हैं, जैसे मोबाइल रिचार्ज की डेडलाइन रिमाइंडर या बिल पेमेंट अलर्ट। OTP भी इसी कैटेगरी में आता है, लेकिन ये बैंक या सर्विस प्रोवाइडर से ही आना चाहिए।
-T यानी ट्रांजेक्शनल – ये सबसे महत्वपूर्ण हैं। बैंक अकाउंट से पैसे कटने, UPI ट्रांसफर या लोन अप्रूवल जैसे डायरेक्ट लेन-देन वाले अपडेट्स के लिए। अगर ये कोड न हो तो बिल्कुल भरोसा न करें। और -G मतलब गवर्नमेंट। सरकारी विभागों या मंत्रालयों से मौसम अपडेट, चुनाव नोटिफिकेशन या पब्लिक सर्विस अलर्ट वाले मैसेज। ये TRAI के स्पेशल अप्रूवल वाले होते हैं।
स्कैमरों से कैसे बचें?
अब असली सवाल – स्कैम कैसे पहचानें? सबसे आसान तरीका हेडर चेक करना। असली बैंक मैसेज कभी 10 डिजिट मोबाइल नंबर से नहीं आते। वो शॉर्ट कोड्स जैसे AD-HDFCBK-P या BK-ICICIB-T जैसे फॉर्मेट में होते हैं। अगर नंबर दिखे या कोड मिसिंग हो, तो डिलीट मारो!
लिंक पर क्लिक करने की फितूर मत करो। ‘आपका अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा’ या ‘KYC अपडेट करो’ जैसे मैसेज में लिंक हो तो सीधे बैंक ऐप या ब्रांच जाओ वेरिफाई करने। स्कैमर ऐसे ही लिंक्स से डेटा चुराते हैं। याद रखो, कोई असली बैंक फोन पर पर्सनल डिटेल्स नहीं मांगेगा।
शिकायत कैसे करें?
अगर संदिग्ध मैसेज मिले तो चुप मत रहो। TRAI के पोर्टल पर जाकर फोटो अपलोड कर रिपोर्ट करो – ये बिल्कुल फ्री और आसान है। या 1930 पर कॉल करके साइबर क्राइम हेल्पलाइन से बात करो। पुलिस भी अब अवेयरनेस कैंप चला रही है, खासकर सीनियर्स के लिए। जितनी ज्यादा रिपोर्ट्स, उतने कम स्कैम्स।
क्यों आया ये नियम?
TRAI ने ये बदलाव मई 2025 से लागू किया ताकि 1.1 बिलियन मोबाइल यूजर्स को स्पष्टता मिले। पहले SMS स्पैम और फिशिंग से परेशान थे, अब हेडर देखते ही पता चल जाता है। DLT सिस्टम ऑटोमैटिक कोड ऐड करता है, बिजनेस को कुछ एक्स्ट्रा नहीं करना पड़ता। बस यूजर्स स्मार्ट बनो! भाइयों-बहनों, फोन चेक करते वक्त थोड़ा ध्यान दो। ये छोटा सा कोड आपकी मेहनत की कमाई बचा सकता है। फैमिली को भी बताओ, क्योंकि स्कैमर सबसे कमजोर टारगेट ढूंढते हैं। ज्यादा डिटेल्स के लिए TRAI वेबसाइट चेक करो। सुरक्षित रहो, सतर्क रहो!




