
कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करने की लंबे समय से चली आ रही मांग पर केंद्र सरकार ने संसद में लिखित जवाब दिया है, दिसंबर 2025 के इस सत्र में सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
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सरकार का जवाब: क्यों नहीं बढ़ रही पेंशन?
श्रम और रोजगार मंत्रालय ने संसद में उठाये गए सवालों का जवाब देते हुए बताया कि पेंशन राशि में वृद्धि न कर पाने के पीछे मुख्य कारण ‘एक्चुअल डेफिसिट’ (actuarial deficit) यानी वित्तीय घाटा है। सरकार के अनुसार:
- फंड की कमी: पेंशन फंड की वर्तमान स्थिति ऐसी नहीं है कि पेंशन राशि में भारी वृद्धि की जा सके।
- बजटीय सहायता: सरकार पहले से ही ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए सालाना 1.16% के अंशदान के अतिरिक्त बजटीय सहायता प्रदान कर रही है।
- महंगाई भत्ता (DA): पेंशन को महंगाई भत्ते से जोड़ने या मुफ्त चिकित्सा सुविधा देने का भी फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
पेंशनरों की प्रमुख मांगें
देशभर के करीब 78 लाख पेंशनभोगी और ‘राष्ट्रीय संघर्ष समिति’ (NAC) लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- न्यूनतम मासिक पेंशन को बढ़ाकर ₹7,500 किया जाए।
- पेंशनभोगियों और उनके जीवनसाथी को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं मिलें।
- पेंशन को महंगाई के अनुसार महंगाई भत्ते (DA) के साथ लिंक किया जाए।
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हायर पेंशन पर अपडेट
जहाँ एक ओर न्यूनतम पेंशन पर राहत नहीं मिली है, वहीं ईपीएफओ (EPFO) ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद ‘हायर पेंशन’ (Higher Pension) के लिए प्राप्त 17.49 लाख आवेदनों में से 99% का निपटारा दिसंबर 2025 तक किया जा चुका है। इससे उन कर्मचारियों को लाभ मिल रहा है जिन्होंने अधिक वेतन पर पेंशन का विकल्प चुना था।

















