MBA के बाद नौकरी छोड़ी, छत पर शुरू की मोती की खेती! ₹45 की लागत में ₹150 का मुनाफा

आज के दौर में जहाँ युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो लीक से हटकर अपनी पहचान बना रहे हैं, ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है एक MBA प्रोफेशनल की, जिन्होंने कॉर्पोरेट जगत की चमक-धमक छोड़ अपनी घर की छत को ही कमाई का जरिया बना लिया

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MBA के बाद नौकरी छोड़ी, छत पर शुरू की मोती की खेती! ₹45 की लागत में ₹150 का मुनाफा
MBA के बाद नौकरी छोड़ी, छत पर शुरू की मोती की खेती! ₹45 की लागत में ₹150 का मुनाफा

आज के दौर में जहाँ युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भारी-भरकम पैकेज वाली नौकरियों के पीछे भाग रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो लीक से हटकर अपनी पहचान बना रहे हैं, ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है एक MBA प्रोफेशनल की, जिन्होंने कॉर्पोरेट जगत की चमक-धमक छोड़ अपनी घर की छत को ही कमाई का जरिया बना लिया।

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नौकरी छोड़ ‘एग्री-प्रीन्योरशिप’ की ओर कदम

MBA की डिग्री हासिल करने के बाद एक अच्छी नौकरी करने वाले संदीप (नाम उदाहरण के तौर पर) ने जब कुछ अपना करने की ठानी, तो उन्होंने ‘मोती की खेती’ (Pearl Farming) को चुना, सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए उन्होंने किसी बड़े खेत या तालाब का इंतजार नहीं किया, बल्कि अपने घर की छत पर प्लास्टिक टैंक लगाकर इस व्यवसाय की शुरुआत की।

मात्र ₹45 की लागत, मुनाफा सीधा तीन गुना

मोती की खेती के अर्थशास्त्र को समझें तो यह किसी भी निवेश से कहीं अधिक रिटर्न देता है। विशेषज्ञों और सफल किसानों के अनुसार:

  • लागत: एक सीप (Oyster) को खरीदने, उसमें न्यूक्लियस डालने और उसके रखरखाव पर करीब ₹40 से ₹45 का खर्च आता है।
  • कमाई: 10 से 12 महीने की मेहनत के बाद, एक सीप से निकलने वाला मोती बाज़ार में अपनी गुणवत्ता के आधार पर ₹150 से लेकर ₹500 तक में बिकता है।
  • डिजाइनर मोती की मांग: यदि मोती को किसी विशेष आकृति (जैसे भगवान की मूर्ति या क्रॉस) में ढाला जाए, तो इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में और भी बढ़ जाती है।

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सीमित संसाधनों में बड़ा मुनाफा

मोती की खेती के लिए बड़े बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती, प्लास्टिक टैंकों में नियंत्रित वातावरण और उचित अमोनिया लेवल बनाए रखकर इसे आसानी से किया जा सकता है, संदीप ने प्रमाणित किया है कि यदि सही तकनीक और धैर्य के साथ काम किया जाए, तो एग्री-बिजनेस में नौकरी से बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है।

कहाँ से लें ट्रेनिंग?

अगर आप भी इस क्षेत्र में हाथ आजमाना चाहते हैं, तो भारत सरकार का केंद्रीय मीठा जल जीवपालन संस्थान (CIFA) इसके लिए पेशेवर प्रशिक्षण प्रदान करता है, इच्छुक युवा CIFA की वेबसाइट के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं, साथ ही, तकनीकी सहायता के लिए NBFGR जैसे संस्थानों से भी संपर्क किया जा सकता है।

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यह कहानी उन युवाओं के लिए एक मिसाल है जो स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं, MBA की सूझबूझ और नवाचार (Innovation) के मेल ने खेती को एक हाई-प्रोफाइल बिजनेस में बदल दिया है।

Rohini Left Job Does Moti Ki Kheti on RooftopSuccess Story
Author
Pinki

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