Lithium Battery Market Alert: चीनी कंपनियों ने बढ़ाए लिथियम बैटरी मटेरियल के दाम, 15% तक महंगाई से EV सेक्टर में हलचल

इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए एक बड़ी चिंताजनक खबर सामने आ रही है, दुनिया भर में लिथियम बैटरी मटेरियल की आपूर्ति पर दबदबा रखने वाली चीनी कंपनियों ने कच्चे माल की कीमतों में 10% से 15% तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है, इस फैसले ने वैश्विक ऑटोमोबाइल सेक्टर, विशेषकर भारतीय EV बाजार में हलचल पैदा कर दी है

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Lithium Battery Market Alert: चीनी कंपनियों ने बढ़ाए लिथियम बैटरी मटेरियल के दाम, 15% तक महंगाई से EV सेक्टर में हलचल
Lithium Battery Market Alert: चीनी कंपनियों ने बढ़ाए लिथियम बैटरी मटेरियल के दाम, 15% तक महंगाई से EV सेक्टर में हलचल

इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग के लिए एक बड़ी चिंताजनक खबर सामने आ रही है, दुनिया भर में लिथियम बैटरी मटेरियल की आपूर्ति पर दबदबा रखने वाली चीनी कंपनियों ने कच्चे माल की कीमतों में 10% से 15% तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है, इस फैसले ने वैश्विक ऑटोमोबाइल सेक्टर, विशेषकर भारतीय EV बाजार में हलचल पैदा कर दी है।

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क्यों बढ़ी कीमतें?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चीन दुनिया के लगभग 70% लिथियम प्रोसेसिंग को नियंत्रित करता है, चीनी उत्पादकों ने उत्पादन लागत में वृद्धि और सप्लाई चेन में आए व्यवधानों को इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण बताया है, 2025 की शुरुआत में आई इस तेजी ने उन वाहन निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है जो अपनी बैटरी आपूर्ति के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर हैं।

EV सेक्टर पर पड़ेगा सीधा असर

किसी भी इलेक्ट्रिक वाहन की कुल लागत का लगभग 40% हिस्सा उसकी बैटरी का होता है, बैटरी मटेरियल में 15% तक की इस वृद्धि का सीधा असर वाहनों की अंतिम कीमत पर पड़ेगा। अनुमान है कि:

  • इलेक्ट्रिक कारों और टू-व्हीलर्स की कीमतों में 5% से 8% तक का इजाफा हो सकता है।
  • निर्माताओं के प्रॉफिट मार्जिन में गिरावट आएगी, जिससे नए मॉडल्स की लॉन्चिंग प्रभावित हो सकती है।

भारतीय बाजार के लिए दोहरी चुनौती

भारत वर्तमान में अपनी लिथियम-आयन सेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा चीन से आयात करता है, कीमतों में इस उछाल से भारत के उभरते हुए EV स्टार्टअप्स और स्थापित दिग्गजों (जैसे टाटा मोटर्स और ओला इलेक्ट्रिक) को अपनी मूल्य निर्धारण रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है, हालांकि, भारत सरकार की PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम के तहत घरेलू सेल निर्माण को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन इसे पूरी तरह सक्रिय होने में अभी समय लगेगा।

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वैकल्पिक तकनीक पर जोर

चीन की इस मोनोपॉली और बढ़ती कीमतों से बचने के लिए अब ऑटो जगत में वैकल्पिक बैटरी तकनीकों पर शोध तेज हो गया है, कई कंपनियां अब सोडियम-आयन (Sodium-ion) और सॉलिड-स्टेट बैटरी तकनीक को प्राथमिकता दे रही हैं, जो लिथियम के मुकाबले सस्ती और अधिक टिकाऊ हो सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लिथियम की कीमतों में यह उछाल जारी रहा, तो 2025 के उत्तरार्ध में EV एडॉप्शन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है ग्राहकों के लिए यह समय इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से पहले बजट और भविष्य की कीमतों का आकलन करने का है।

Lithium Battery Market Alert
Author
Pinki

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