
आधार कार्ड को लेकर केंद्र सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने ‘आधार (प्रमाणीकरण और ऑफलाइन सत्यापन) संशोधन विनियम, 2025’ को अधिसूचित कर दिया है, इस नए नियम के तहत अब ‘आधार फेस ऑथेंटिकेशन’ (Aadhaar Face Authentication) को फिंगरप्रिंट और ओटीपी (OTP) के समान ही कानूनी मान्यता मिल गई है।
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क्या है आधार फेस ऑथेंटिकेशन?
आधार फेस ऑथेंटिकेशन एक अत्याधुनिक तकनीक है, जिसमें व्यक्ति की पहचान उसके चेहरे के जरिए की जाती है, जब कोई व्यक्ति इस सुविधा का उपयोग करेगा, तो सिस्टम उसके लाइव चेहरे को आधार डेटाबेस में मौजूद फोटो से 1:1 मैच करेगा, यदि दोनों तस्वीरें मिल जाती हैं, तो सत्यापन सफल माना जाएगा।
निजी संस्थाएं भी कर सकेंगी उपयोग
अब तक बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए मुख्य रूप से सरकारी मशीनरी का उपयोग होता था, लेकिन नए नियमों के बाद अब बैंक, होटल, टेलीकॉम कंपनियां और अन्य निजी संस्थाएं भी पहचान सुनिश्चित करने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन का उपयोग कर सकेंगी, इससे होटल चेक-इन या नया सिम कार्ड लेने जैसी प्रक्रियाएं पूरी तरह पेपरलेस और तेज हो जाएंगी।
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नई व्यवस्था की बड़ी बातें
- सरकार ने ऑफलाइन फेस वेरिफिकेशन की सुविधा भी पेश की है। इसमें इंटरनेट या UIDAI के सर्वर से सीधे जुड़े बिना भी स्थानीय स्तर पर व्यक्ति की पहचान की जा सकेगी।
- यह सिस्टम पूरी तरह से सहमति (Consent) पर आधारित है, उपयोगकर्ता यह तय कर सकेगा कि उसे कितनी जानकारी साझा करनी है।
- अक्सर बुजुर्गों या शारीरिक श्रम करने वाले लोगों के फिंगरप्रिंट घिस जाने के कारण आधार सत्यापन में दिक्कत आती थी। फेस ऑथेंटिकेशन ऐसे लोगों के लिए वरदान साबित होगा।
- नए नियमों में AVC का प्रावधान है, जिससे आप केवल जरूरी जानकारी (जैसे फोटो या जन्मतिथि) ही साझा कर पाएंगे, जिससे डेटा लीक होने का खतरा कम होगा।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई व्यवस्था डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम के मानकों के अनुरुप तैयार की गई है, इसका उद्देश्य नागरिकों की गोपनीयता को बनाए रखते हुए जालसाजी और धोखाधड़ी को रोकना है।

















