
कर्नाटक चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बड़ा खुलासा किया था — कि राज्य में हजारों वोट सॉफ्टवेयर और कॉल सेंटर की मदद से डिलीट किए गए हैं। उस वक्त बीजेपी ने उनके इस दावे को झूठा बताया था, लेकिन अब कर्नाटक सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में राहुल गांधी की बात को लगभग सही ठहरा दिया है। यह मामला अब सियासी हलकों में बड़े विवाद का रूप ले चुका है।
Table of Contents
SIT की रिपोर्ट ने किया दावा सही
कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस सरकार द्वारा गठित SIT ने अपनी 22 हजार पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट कलबुर्गी अदालत में दाखिल की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, आलंद विधानसभा क्षेत्र के महादेवपुरा इलाके में करीब 5,994 वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से अवैध रूप से हटाए गए थे। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि यह काम एक संगठित समूह द्वारा चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल को हैक कर किया गया था। राहुल गांधी का दावा था कि लगभग 6,000 वोट ऐसे हटाए गए जो असल में जीवित मतदाता थे, और अब SIT की जांच ने उसी दावे को बल दिया है।
मास्टरमाइंड कौन था?
SIT की चार्जशीट के मुताबिक इस “वोट चोरी” का मास्टरमाइंड बीजेपी के चार बार के विधायक सुभाष गुट्टेदार, उनके बेटे हर्षानंद गुट्टेदार, और उनके निजी सहायक टिप्पेरुद्र को बताया गया है। यही लोग पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। जांच में सामने आया कि इन लोगों ने कुछ सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की मदद से ऐसा सिस्टम तैयार किया, जिसके जरिए चुनाव आयोग के NVSP पोर्टल में घुसपैठ की गई और हजारों नामों को बिना जानकारी के हटाया गया।
कैसे हुआ था फर्जीवाड़ा?
SIT रिपोर्ट के अनुसार, गैंग में शामिल अकरम पाशा, असलम पाशा, और मोहम्मद अशफाक ने OTP सिस्टम को बाईपास करने वाला सॉफ्टवेयर तैयार किया। ये लोग पहले मतदाताओं के आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबरों को बदलते, फिर फॉर्म-7 भरकर वोट डिलीट कर देते। इतनी सफाई से यह काम किया गया कि ज्यादातर लोगों को अपने नाम कटने की खबर तक नहीं लगी।
इसी दौरान जांच में एक और नाम सामने आया बापी आद्या, जो “ओटीपीबाजार” नाम की वेबसाइट चलाता था। यह वेबसाइट OTP बाईपास सर्विस उपलब्ध कराती थी। इस गिरोह को कथित रूप से 4.8 लाख रुपये भुगतान किया गया, हर वोट के लिए 80 रुपये के हिसाब से।
अब तक की कार्रवाई
SIT ने इस मामले में 7 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। बीजेपी विधायक सुभाष गुट्टेदार और उनके बेटे को अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जबकि बापी आद्या को पहले ही गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे जमानत मिल गई। इस चार्जशीट में 200 से ज्यादा गवाहों के बयान, कॉल रिकॉर्ड्स, बैंक ट्रांजैक्शन, IP लॉग्स और वोटर लिस्ट से जुड़े डिजिटल सबूत शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने पहले किया था इनकार
राहुल गांधी के आरोपों के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने उस वक्त सफाई देते हुए कहा था कि वोटर लिस्ट से नाम हटाना ऑनलाइन संभव नहीं और सभी प्रक्रिया नियमित थी। परंतु अब SIT रिपोर्ट के बाद आयोग पर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या निगरानी में चूक हुई थी या तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर यह छेड़छाड़ की गई?
राहुल गांधी का पलटवार
राहुल गांधी ने SIT रिपोर्ट सामने आने के बाद कहा है कि “अब सच सामने आ गया है, देश के लोकतंत्र से सबसे बड़ा विश्वासघात किया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेताओं ने सुनियोजित तरीके से वोटरों की लिस्ट में छेड़छाड़ कर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश की। दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई उनकी हालिया रैली में राहुल गांधी ने कहा कि वह “इस मुद्दे को अब जनता के बीच लेकर जाएंगे और इसे चुनावी सुधार का आंदोलन” बनाएंगे।
लोकतंत्र पर बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ कर्नाटक की राजनीति का मामला नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और तकनीकी सुरक्षा पर बड़ा सवाल है। अगर वोटर लिस्ट में इतनी आसानी से छेड़छाड़ संभव थी, तो देशभर में डिजिटल चुनाव प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता उठना स्वाभाविक है। अब देखना यह होगा कि कर्नाटक की अदालत आगे क्या रुख अपनाती है और क्या इन खुलासों के बाद चुनाव आयोग कोई ठोस कदम उठाता है या नहीं।




