
भारतीय सड़क ढांचे में एक और बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे योजना अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल तीनों राज्यों को जोड़ने वाली एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना है, जो न केवल यात्रा को तेज बनाएगी, बल्कि पूरे पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।
Table of Contents
भूमि अधिग्रहण और DPR का अंतिम चरण
वर्तमान में यह परियोजना निर्माण चरण में नहीं है, लेकिन भूमि अधिग्रहण और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की प्रक्रिया लगभग अपने अंतिम चरण पर है। उत्तर प्रदेश में कार्यों की शुरुआत पहले ही हो चुकी है, जबकि बिहार में हाल के महीनों में भूमि अधिग्रहण की गति बढ़ी है। पश्चिम बंगाल में भी प्रारंभिक सर्वे और चिन्हांकन का काम पूरा हो चुका है।
जानकारी के अनुसार, परियोजना की टेंडर प्रक्रिया जनवरी 2023 से शुरू कर दी गई थी, जिससे निर्माण की तैयारी को औपचारिक रूप मिला। हालांकि, जमीन पर निर्माण तभी शुरू होगा जब तीनों राज्यों में भूमि अधिग्रहण पूरी तरह संपन्न हो जाएगा और सभी पर्यावरणीय और प्रशासनिक मंजूरियां मिल जाएंगी।
2028 तक शुरू हो सकती है एक्सप्रेसवे यात्रा
सरकारी योजनाओं और विशेषज्ञ अनुमानों के मुताबिक, परियोजना को 2028 तक पूरा करने और संचालन में लाने का लक्ष्य रखा गया है। यानी अगर सब कुछ तय समय पर चलता रहा, तो मात्र कुछ वर्षों में लोग गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक का सफर कुछ घंटों में पूरा कर सकेंगे। अब जबकि अभी यह योजना कागजों पर तेज़ी से आगे बढ़ रही है, उम्मीद यही है कि आने वाले एक-दो सालों में इस पर निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा।
एक्सप्रेसवे की लंबाई और मार्ग
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 519 से 568 किलोमीटर के बीच तय की गई है। यह तीन राज्यों से गुजरेगा —
- उत्तर प्रदेश: लगभग 84 किलोमीटर हिस्सा
- बिहार: करीब 417 किलोमीटर
- पश्चिम बंगाल: केवल 19 किलोमीटर, लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद अहम
यह एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शुरू होकर सिलीगुड़ी तक जाएगा, जो भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है।
यात्रा होगी आधे समय में पूरी
इस एक्सप्रेसवे के बन जाने के बाद गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक का सफर, जो वर्तमान में 14–15 घंटे का होता है, घटकर सिर्फ 6 से 8 घंटे में पूरा हो सकेगा। यह सड़क एक 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगी, जिसे भविष्य में 6-लेन तक अपग्रेड किया जा सकेगा। इसका मतलब है तेज़, सुरक्षित और बिना रुकावट के सफर खासकर व्यवसायिक ट्रकों और लंबी दूरी के यात्रियों के लिए।
पूर्वोत्तर के लिए नया आर्थिक गलियारा
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यह पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत को जोड़ने वाला नया आर्थिक कॉरिडोर साबित होगा। उत्तर प्रदेश से शुरू होकर बिहार और फिर सिलीगुड़ी होते हुए उत्तर बंगाल से जुड़ना इसका मतलब है कि असम, सिक्किम, अरुणाचल और नागालैंड जैसे राज्यों तक रोड कनेक्टिविटी पहले से कहीं आसान हो जाएगी।
इस मार्ग से न केवल व्यापार और लॉजिस्टिक सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन, विशेषकर नेपाल और दार्जिलिंग क्षेत्र की यात्रा भी और सुविधाजनक हो जाएगी।
भारतमाला परियोजना का अहम हिस्सा
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को ‘भारत माला परियोजना’ (Bharatmala Project) के तहत डिवेलप किया जा रहा है, जो देश के रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कों के नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की सबसे बड़ी पहल है। इसमें न सिर्फ यात्रियों के लिए बेहतर सड़कें बन रही हैं, बल्कि यह डिफेंस कॉरिडोर और सीमावर्ती राज्यों की कनेक्टिविटी के लिहाज से भी बेहद उपयोगी साबित होगी।
रोजगार और निवेश की संभावना
इस एक्सप्रेसवे के बनने से तीनों राज्यों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्माण चरण में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को काम मिलेगा। इसके अलावा, सड़क के किनारे औद्योगिक क्लस्टर, वेयरहाउसिंग जोन और सर्विस एरिया विकसित किए जाने की योजना भी है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बूस्ट मिलेगा।

















