
पूर्वांचल के लोगों के लिए एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। गंगा नदी पर छह लेन के विशाल पुल के निर्माण के साथ-साथ अब इसके दोनों छोरों पर 15-15 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। यह सड़क एनएच-135 (मीरजापुर-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग) को सीधे गंगा पुल से जोड़ेगी, जिससे न केवल प्रयागराज और मीरजापुर के बीच यातायात सुगम होगा, बल्कि मध्य प्रदेश से पूर्वांचल तक भारी वाहनों की आवाजाही भी आसान हो जाएगी।
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भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य तेज़ी पर
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2500 किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। प्रशासन के अनुसार 75 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण पूरा हो चुका है, जबकि शेष 25 प्रतिशत किसानों को जल्द ही मुआवजा दिया जाएगा। भूमि मिलते ही मिट्टी डालने और स्तर समतल करने का कार्य जोरों पर है। एनएचएआई और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से सड़क निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए समोगरा, पुरजागिर, मवैया, चेकसारी और श्रीपट्टी जैसे क्षेत्रों में कार्य शुरू कर दिया गया है। यह सड़क मीरजापुर-रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग से निकलकर शिवपुर विंध्याचल की ओर जाएगी। आगे कोन ब्लॉक के मजरा मार्ग से होते हुए यह सड़क कई गांवों को छूते हुए मीरजापुर-औराई मार्ग से जुड़ जाएगी।
गंगा के दूसरी ओर भी निर्माण की तेज़ रफ़्तार
गंगा के विपरीत दिशा यानी दूसरी ओर भी सड़क निर्माण का काम पूरे जोश से चल रहा है। यहां सड़क अमरावती, भवानीपुर, ओझला और अन्य गांवों से होकर गुजरेगी और समोगरा गांव के पास एनएच-135 से जाकर मिलेगी। इस सड़क की कुल लंबाई 15 किलोमीटर और चौड़ाई लगभग 60 मीटर रखी गई है, ताकि भविष्य में बढ़ते ट्रैफिक को आसानी से संभाला जा सके।
1700 करोड़ रुपये का मेगा प्रोजेक्ट
करीब 1700 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाला यह छह लेन पुल और फोरलेन बाइपास रोड परियोजना क्षेत्रीय विकास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इस परियोजना से पूर्वांचल, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों के बीच माल और यात्रियों का आवागमन काफी तेज़ होगा। उम्मीद है कि पुल के बनने के बाद प्रयागराज से मीरजापुर और रीवा तक की यात्रा का समय लगभग आधा रह जाएगा।
इस बहुप्रतीक्षित निर्माण का जिम्मा दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित कंपनी शिवाल्या कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को सौंपा गया है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर पी.के. चौधरी ने बताया कि निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। भूमि समतलीकरण, मिट्टी भराई और सड़क की आधार परत बनाने का काम वर्तमान में प्राथमिकता पर है। कंपनी का लक्ष्य है कि समय पर पुल और सड़क दोनों का निर्माण पूरा कर क्षेत्र के लोगों को विकास का यह उपहार दिया जाए।
किसानों को मिलेगा उचित मुआवजा
परियोजना से जुड़े लगभग 2500 किसानों को भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा दिया जा रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार अधिकांश किसानों को भुगतान किया जा चुका है, और बाकी किसानों को भी शीघ्र ही अवार्ड के अनुसार भुगतान दिया जाएगा। कुछ किसानों ने मुआवजे की दरों को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं, जिन्हें निपटाने की दिशा में बातचीत चल रही है।
क्षेत्रीय विकास की नई उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पुल और फोरलेन मार्ग के बनने से न केवल यातायात व्यवस्था सुचारू होगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाकों में व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मिर्जापुर, विंध्याचल और आस-पास के कस्बों में लॉजिस्टिक हब और गोदाम विकसित होने की संभावना है। इसके अलावा, तीर्थस्थलों और पर्यटन स्थलों की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को भी इससे बहुत राहत मिलेगी।
इस परियोजना से आमजन, किसान और व्यवसायी सभी वर्गों में उत्साह है। गंगा किनारे बसे गांवों को अब अपने विकास की नई दिशा दिखाई देने लगी है। पुल और बाइपास सड़क बनने के बाद न केवल पूर्वांचल और मध्य प्रदेश के बीच की दूरी घटेगी, बल्कि यह क्षेत्र आर्थिक और औद्योगिक रूप से भी नए युग में प्रवेश करेगा।

















