उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल गंगा एक्सप्रेसवे अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। परियोजना की भौतिक प्रगति 93.27 प्रतिशत दर्ज की गई है, लेकिन प्रयागराज जिले के सोरांव तहसील में कुछ गांवों के किसानों के साथ भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद अब भी बना हुआ है।

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विकास समीक्षा बैठक में उठी भूमि विवाद की बात
शुक्रवार को प्रयागराज में हुई विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में एडीएम सिटी सत्यम मिश्र ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि एसडीए सोरांव के साथ मिलकर विवादित मामलों का जल्द निस्तारण किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की संतुष्टि के बिना परियोजना को आगे बढ़ाना कठिन होगा, इसलिए खुले संवाद और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जाए।
किन गांवों में फंसा अधिग्रहण?
सोरांव क्षेत्र के जिन गांवों में भूमि विवाद अब भी बना हुआ है, उनमें पूरबनारा, सराय मदन सिंह उर्फ चांटी, गिरधरपुर गोड़वा और सराय हरीराम प्रमुख हैं। इन इलाकों के कुछ काश्तकार मुआवजा राशि और अंश निर्धारण को लेकर असंतुष्ट हैं। प्रशासन ने किसानों से सीधी बातचीत कर उनका पक्ष समझने और उचित समाधान निकालने का भरोसा दिया है।
परियोजना का निर्माण और लागत
गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 594 किलोमीटर है, जो मेरठ से प्रयागराज तक 12 जिलों से होकर गुजरेगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹36,229.67 करोड़ की लागत आ रही है। प्रयागराज जिले में इसकी लंबाई 15.647 किलोमीटर तय की गई है।
इनर रिंग रोड पर भी ध्यान
गंगा एक्सप्रेसवे के अलावा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्रयागराज इनर रिंग रोड का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। यह प्रोजेक्ट तीन चरणों में पूरा किया जा रहा है, लेकिन कुछ हिस्सों में भूमि के अंश निर्धारण को लेकर किसानों के बीच आपसी विवाद बने हुए हैं। एडीएम सिटी ने राष्ट्रीय राजमार्ग अभियंता, पुलिस विभाग और उपजिलाधिकारी को मिलकर इन मामलों को प्राथमिकता से सुलझाने के निर्देश दिए।
प्रशासन का लक्ष्य: नई साल में सुगम निर्माण
अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सभी विवादों के हल होने के बाद आने वाले महीनों में परियोजना का काम पूरी गति से आगे बढ़ेगा। प्रशासन चाह रहा है कि 2026 की शुरुआत तक प्रयागराज के हिस्से का कार्य पूर्ण हो जाए ताकि एक्सप्रेसवे को समयसीमा में पूरा किया जा सके।

















