देशभर के बैंकों ने ग्राहकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वेरिफिकेशन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब नए बैंक खाते खुलवाने के लिए केवल ऑनलाइन प्रक्रिया पर्याप्त नहीं होगी, ग्राहकों को शाखा में जाकर या बैंक अधिकारी के सामने फिजिकल वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम बढ़ते साइबर फ्रॉड और फर्जी खातों की रोकथाम के उद्देश्य से उठाया गया है।

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ऑनलाइन फ्रॉड से सतर्क हुए बैंक
पिछले कुछ महीनों में बैंकिंग सेक्टर में फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आए, जिनमें ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए जाली दस्तावेज़ों से खाते खोले गए थे। इस प्रवृत्ति को देखते हुए अब अधिकांश प्रमुख बैंक, जैसे एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा, डिजिटल वेरिफिकेशन की जगह फिजिकल प्रक्रिया अपना रहे हैं।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा को मज़बूत करेगा और ग्राहकों की पहचान की पूरी तरह से पुष्टि करेगा।
नई प्रक्रिया कैसे होगी
नए नियमों के तहत, ग्राहकों के पास तीन विकल्प होंगे—
- बैंक ब्रांच जाकर स्वयं वेरिफिकेशन कराना।
- रिलेशनशिप मैनेजर के माध्यम से बैंक में अपॉइंटमेंट लेकर पुष्टि करवाना।
- बैंक अधिकारी के घर या ऑफिस आकर वेरिफिकेशन करना।
साथ ही, बैंकों ने अपने स्टाफ को यह निर्देश दिया है कि वे केवल अपने कार्यक्षेत्र के अंदर आने वाले आवेदनों पर ही नए खाते खोलें, ताकि रिकॉर्ड सही और ट्रेस करने योग्य रहे।
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किन सेवाओं पर पड़ेगा असर
आईसीआईसीआई बैंक ने अभी के लिए इंस्टा-अकाउंट सर्विस अस्थायी रूप से रोक दी है। केवल सैलरी खातों के लिए ही डिजिटल प्रक्रिया जारी रहेगी, जबकि बचत और चालू खाते के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन जरूरी होगा। अन्य बैंकों ने भी धीरे-धीरे समान नीतियां लागू करनी शुरू कर दी हैं, जिससे ऑनलाइन अकाउंट खोलने की प्रक्रिया फिलहाल धीमी पड़ सकती है।
ग्राहकों के लिए क्या है जरूरी
बैंक ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने केवाईसी दस्तावेज़ (आधार, पैन, पते का प्रमाण आदि) अद्यतन रखें और शाखा से संपर्क करके वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करें। ऐसा नहीं करने पर बैंक खातों पर अस्थायी रोक या जुर्माने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

















