
तुर्की के मध्य अनातोलिया क्षेत्र, विशेषकर कोन्या मैदान में, कुदरत का एक हैरान कर देने वाला और खौफनाक रुप सामने आया है, यहां बीते कुछ समय में अचानक 700 से अधिक विशालकाय गड्ढे (सिंकहोल्स) सामने आए हैं, इन गड्ढों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि ने न केवल स्थानीय निवासियों को दहशत में डाल दिया है, बल्कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों को भी सकते में ला दिया है।
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क्या है मामला?
ये गड्ढे, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘ओब्रुक’ (obruk) कहा जाता है, खेत-खलिहानों के बीच अचानक फटकर सामने आ रहे हैं, इनमें से कई गड्ढे इतने बड़े हैं कि इनकी चौड़ाई 100 फीट तक है और गहराई सैकड़ों फीट तक जाती है, ये सिंकहोल्स शाब्दिक अर्थों में जमीन को निगल रहे हैं, जिससे खेती योग्य जमीन खत्म हो रही है और जान-माल के खतरे की आशंका बढ़ गई है।
वैज्ञानिकों ने बताई वजह: सूखा और जलदोहन
इस रहस्यमयी घटना के पीछे के कारणों की जांच कर रहे वैज्ञानिकों ने प्राथमिक रूप से दो प्रमुख कारकों को जिम्मेदार ठहराया है:
- यह क्षेत्र लंबे समय से गंभीर सूखे की चपेट में है, जो जलवायु परिवर्तन का सीधा परिणाम माना जा रहा है।
- कृषि के लिए इस इलाके में दशकों से अनियंत्रित रूप से और भारी मात्रा में जमीन के नीचे का पानी (भूजल) पंप किया जा रहा है।
इन दोनों वजहों से भूमिगत जलभृतों (aquifers) में पानी का स्तर ऐतिहासिक रूप से गिर गया है, जमीन के नीचे मौजूद प्राकृतिक गुफाएं और खाली जगहें पानी के सहारे टिकी हुई थीं, जलस्तर गिरने से इन गुफाओं की छतें कमजोर हो गईं और दबाव पड़ने पर अचानक ढह गईं, जिससे सतह पर विशाल गड्ढे बन गए।
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बड़ी चेतावनी और समाधान की तलाश
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोन्या में सिंकहोल्स का यह विस्फोट जलवायु परिवर्तन का एक स्पष्ट और खतरनाक संकेत है, यह घटना दर्शाती है कि पानी का अनियंत्रित इस्तेमाल किस हद तक भौगोलिक संतुलन को बिगाड़ सकता है।
स्थानीय प्रशासन और वैज्ञानिक अब इस खतरे से निपटने के लिए कदम उठा रहे हैं, विशेषज्ञों ने तत्काल प्रभाव से पानी के उपयोग को विनियमित करने, अवैध रुप से खोदे गए कुओं पर प्रतिबंध लगाने और भविष्य के जोखिमों का मानचित्रण (risk mapping) करने की सिफारिश की है ताकि इस प्राकृतिक आपदा को और विकराल रुप लेने से रोका जा सके।

















